चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि चार राज्यो उड़ीसा, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और सिक्किम में लोकसभा चुनाव के साथ में विधानसभा चुनाव भी होंगे। लेकिन जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव नहीं कराया जाएंगे। इलेक्शन कमिशन सुरक्षा कारणों का हवाला दे कर करवा चुनाव नहीं कराने की बात कर रहा है। जिसके बाद चुनाव आयोग के फैसले पर विवाद शुरू हो गया है।
ऐसा नहीं है कि सिर्फ रमजान के दौरान चुनाव कराने को लेकर ही चुनाव आयोग विपक्ष के निशाने पर है। जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के फैसले की वजह से इलेक्शन कमिशन राजनीतिक दलों के वार झेल रहा है। महबूबा मुफ्ती पहले ही इसे केंद्र की चाल बता चुकी है। वहीं अब नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला ने भी आयोग के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने ट्वीट का लिखा जम्मू कश्मीर में विधानसभा का आम चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ नहीं कराना मोदी सरकार की कश्मीर नीति की विफलता की निशानी है। जब सुरक्षा बल लोकसभा चुनाव करा करते हैं तो वही उसी दिन वहां विधानसभा का चुनाव क्यों नहीं करा सकते। केंद्र का तर्क बेतुका है और बीजेपी का बहाना बचकाना है। विपक्ष इलेक्शन कमिशन के फैसले को लेकर हमलावर हो गया है। इलेक्शन कमिशन सुरक्षा कारणों का हवाला दे रहा है, लेकिन विपक्ष इसे मानने को तैयार नहीं। आपका क्या कहना है इलेक्शन कमिशन के इस फैसले के बारे में हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं।
ऐसा नहीं है कि सिर्फ रमजान के दौरान चुनाव कराने को लेकर ही चुनाव आयोग विपक्ष के निशाने पर है। जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के फैसले की वजह से इलेक्शन कमिशन राजनीतिक दलों के वार झेल रहा है। महबूबा मुफ्ती पहले ही इसे केंद्र की चाल बता चुकी है। वहीं अब नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला ने भी आयोग के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं।
फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि जब सभी दल चाहते हैं कि चुनाव हो तो फिर लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव क्यों नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि यहां पर्याप्त सुरक्षा बल मौजूद है स्थानीय पंचायत चुनाव शांतिपूर्ण हुए तो विधानसभा चुनाव क्यों नहीं हो सकते। वहीं मायावती ने भी फारुख अब्दुल्लाह का समर्थन करते हुए मोदी सरकार पर हमला बोला है।
उन्होंने ट्वीट का लिखा जम्मू कश्मीर में विधानसभा का आम चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ नहीं कराना मोदी सरकार की कश्मीर नीति की विफलता की निशानी है। जब सुरक्षा बल लोकसभा चुनाव करा करते हैं तो वही उसी दिन वहां विधानसभा का चुनाव क्यों नहीं करा सकते। केंद्र का तर्क बेतुका है और बीजेपी का बहाना बचकाना है। विपक्ष इलेक्शन कमिशन के फैसले को लेकर हमलावर हो गया है। इलेक्शन कमिशन सुरक्षा कारणों का हवाला दे रहा है, लेकिन विपक्ष इसे मानने को तैयार नहीं। आपका क्या कहना है इलेक्शन कमिशन के इस फैसले के बारे में हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं।





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