केंद्र की सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की सफाई को लेकर कई प्रण लिए थे। कहा गया था कि सरकार मैली गंगा को साफ करके ही दम लेगी। इसके लिए नमामि गंगे नाम से परियोजना का शुभारंभ हो गया, इतना ही नहीं गंगा की सफाई के लिए राष्ट्रीय गंगा परिषद भी बनाई गई जिसके अध्यक्ष खुद धानमंत्री नरेंद्र मोदी है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस परिषद की आज तक एक भी बैठक नहीं हुई। इसका खुलासा आरटीआई से हुआ है।
पीएम मोदी खुद को मां गंगा का बेटा बताते हैं। मां गंगा की सफाई के लिए बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन गंगा की सफाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाते। जी हां यह सच है और इस सच का खुलासा हुआ है एक आरटीआई से। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मोदी जी ने अधिकारियों से कहकर इस पर करोड़ों रुपया खर्च तो करवा दिया लेकिन सामने आकर मां गंगा पर ध्यान तक नहीं दिया। दरअसल सूचना के अधिकार के तहत यह पता चला है कि गंगा की सफाई के लिए राष्ट्रीय गंगा परिषद बनाई गई थी। अब सरकार का कार्यकाल खत्म होने को है लेकिन राष्ट्रीय गंगा परिषद की एक भी बैठक नहीं हुई है। जबकि यह जरूरी है कि साल में कम से कम एक बार इस समिति की बैठक पीएम की अध्यक्षता में संपन्न हो, क्योंकि खुद पीएम नरेंद्र मोदी इस समिति के अध्यक्ष हैं।
गंगा नदी के संरक्षण और प्रबंधन के लिए अक्टूबर 2016 में राष्ट्रीय गंगा परिषद का गठन किया गया था। इस दौरान एक अधिसूचना जारी कर कहा गया था कि एनसीजी साल में कम से कम एक या इससे अधिक बार बैठक कर सकती है, लेकिन यह एक बार भी नहीं हो सका।
आपको बता दें कि राष्ट्रीय गंगा परिषद को पहले राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिक प्राधिकरण के नाम से जाना जाता था लेकिन मोदी सरकार ने इस का विघटन कर दिया और खुद के अध्यक्ष बन बैठे। मगर हैरान करने वाली बात तो यह है कि उनकी तरफ से अभी तक कोई बैठक तक नहीं बुलाई गई। इसके बाद अब यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या पीएम मोदी का मां गंगा प्रेम झूठा है? क्या पीएम मोदी सिर्फ गंगा सफाई का ढोंग रचते हैं? आपकी क्या राय है इस बारे में कमेटी के माध्यम से जरूर बताएं।
पीएम मोदी खुद को मां गंगा का बेटा बताते हैं। मां गंगा की सफाई के लिए बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन गंगा की सफाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाते। जी हां यह सच है और इस सच का खुलासा हुआ है एक आरटीआई से। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मोदी जी ने अधिकारियों से कहकर इस पर करोड़ों रुपया खर्च तो करवा दिया लेकिन सामने आकर मां गंगा पर ध्यान तक नहीं दिया। दरअसल सूचना के अधिकार के तहत यह पता चला है कि गंगा की सफाई के लिए राष्ट्रीय गंगा परिषद बनाई गई थी। अब सरकार का कार्यकाल खत्म होने को है लेकिन राष्ट्रीय गंगा परिषद की एक भी बैठक नहीं हुई है। जबकि यह जरूरी है कि साल में कम से कम एक बार इस समिति की बैठक पीएम की अध्यक्षता में संपन्न हो, क्योंकि खुद पीएम नरेंद्र मोदी इस समिति के अध्यक्ष हैं।
गंगा नदी के संरक्षण और प्रबंधन के लिए अक्टूबर 2016 में राष्ट्रीय गंगा परिषद का गठन किया गया था। इस दौरान एक अधिसूचना जारी कर कहा गया था कि एनसीजी साल में कम से कम एक या इससे अधिक बार बैठक कर सकती है, लेकिन यह एक बार भी नहीं हो सका।
आपको बता दें कि राष्ट्रीय गंगा परिषद को पहले राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिक प्राधिकरण के नाम से जाना जाता था लेकिन मोदी सरकार ने इस का विघटन कर दिया और खुद के अध्यक्ष बन बैठे। मगर हैरान करने वाली बात तो यह है कि उनकी तरफ से अभी तक कोई बैठक तक नहीं बुलाई गई। इसके बाद अब यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या पीएम मोदी का मां गंगा प्रेम झूठा है? क्या पीएम मोदी सिर्फ गंगा सफाई का ढोंग रचते हैं? आपकी क्या राय है इस बारे में कमेटी के माध्यम से जरूर बताएं।





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