आम चुनाव के पहले जहां एक तरफ राफेल के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष में तू-तू मैं-मैं का सिलसिला जारी है, तो वहीं दूसरी तरफ अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। जहां राफेल मुद्दे पर दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर कल सुनवाई हुई। कल अदालत में सरकार और याचिकाकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई। वहीं अदालत की अगली सुनवाई अब 14 मार्च को होगी। राफेल मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब केंद्र सरकार ने अदालत में यह बताया कि जिन दस्तावेजों को अदालत में पेश किया जा रहा है वह चोरी हो गए थे और इसकी आंतरिक जांच की जा रही है।
दरअसल राफेल मामले में कल सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका पर अहम सुनवाई हुई इस दौरान याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि कोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में जो फैसला सुनाया वह गलत दस्तावेजों के आधार पर है। जबकि सही दस्तावेज तो अब सामने आ रहे हैं। इस पर केंद्र की तरफ से अटॉर्नी जनरल वेणु गोपाल ने कहा जो दस्तावेज हिंदू अखबार में छपे हैं वह चोरी के हैं। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने पूछा कि रक्षा मंत्रालय के संबंधित विभाग के प्रमुख यहीं बात कहते हुए हलफनामा देंगे? इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा हम कल तक हलफनामा जमा करवा देंगे। अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से कहा कि वह याचिकाकर्ताओं से दस्तावेज पाने का जरिया पूछे और इनका तरीका उचित लगे तो जरूर सुनवाई करें।
इस पर जस्टिस केएम जोसेफ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर सबूत पुख्ता है और भ्रष्टाचार हुआ है तो जांच जरुर होनी चाहिए। जस्टिस केएम जोसेफ के सवाल पर अटॉर्नी जनरल ने कहा दुनिया के किसी देश में रक्षा सौदों पर इस तरह कोर्ट में सुनवाई नहीं होती। इस पर जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा तब तो बोफोर्स पर भी सुनवाई नहीं होनी चाहिए थी। कोर्ट ने कहा कि आप सीधा-सीधा यह कह रहे हैं कि कुछ दस्तावेज हमारे सामने आए हैं और हम उनको देखे ही नहीं। जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि आप राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर बच नहीं सकते। इस दौरान अटॉर्नी जनरल वेणु गोपाल ने कहा इस मामले को राजनीतिक रूप दिया जा रहा है ऐसे में कोर्ट से अपील है कि वह इस मामले में संयम बरतें, रक्षा खरीद की न्यायिक जांच नहीं हो सकती है। वहीं अब इस मामले पर सुनवाई 14 मार्च को होगी। आपकी क्या राय है इस बारे में हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं।




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