आपने वो कहावत तो जरूर सुनी होगी कि सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली, लेकिन ऐसी अनोखी बिल्ली आपने कभी नहीं देखी होगी। चलिए हम आपको बताते हैं ऐसी ही बिल्ली के बारे में। दरअसल पाकिस्तान के लोग इमरान खान के लिए नोबेल पीस प्राइज की मांग कर रहे हैं। शायद उन्हें पता नहीं कि नोबेल पीस प्राइज किस बात के लिए दिया जाता है। लग रहा है कि वह नोबेल पीस प्राइज को पेशावर की बिरयानी समझ बैठे हैं।
दुनिया भर में आतंक का नाम लेते ही पाकिस्तान सबसे पहले आता है। दरअसल आज पाकिस्तान पूरी दुनिया को शांति का पढ़ाने में लग गया है, लेकिन एक खुली किताब की तरह साफ है की पाकिस्तान की पहचान ही दहशतगर्दी से है। भारत के विंग कमांडर अभिनंदन को रिहा करके पाकिस्तान अपनी वाहवाही लूटने में लगा है और कुछ ऐसा दिखाने की कोशिश में लगा है कि उसने विंग कमांडर को रिहा कर के अपनी दरियादिली दिखाई है। जबकि किन परिस्थितियों में पाकिस्तान ने अपने घुटने टेके हैं वह की बताने की जरूरत नहीं है।
इस कदम के बाद पाकिस्तान अपनी पीठ थपथपाने में जुट गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के इमरान खान को वहां की जनता शांति का नोबेल पुरस्कार देने की मांग कर रही है। पाकिस्तानी जनता ने ऑनलाइन पिटीशन दायर करके इमरान खान को नोबेल पीस प्राइज देने की बात रखी है। भारतीय विंग कमांडर को रिहा करने के बाद से ही पाकिस्तान में ट्विटर पर बाढ़ सी आ गई है कि इमरान खान के इस कदम के लिए उन्हें नोबेल पीस प्राइज मिला चाहिए। एक पत्रिका के मुताबिक इमरान खान के लिए एक ऑनलाइन पिटिशन भी रखा गया है, इसे लगभग 60000 लोगों ने साइन किया है। इतना ही नहीं पाकिस्तान में हैशटैग नोबेल पीस प्राइज फॉर इमरान खान ट्रेंड कर रहा है और लगभग 24000 लोगों ने इस हैशटैग्स के साथ मैसेज पोस्ट किए है।
टि्वटर पर लोगों का कहना है कि इमरान ने भारतीय वायु सेना के कमांडर को छोड़कर शांति की एक नई मिसाल कायम की है और इस वजह से उन्हें पुरस्कार मिलना चाहिए। इमरान को नोबेल पीस प्राइज मिलता है या नहीं यह तो समय ही बताएगा। लेकिन बारूद के ढेर पर बैठे पाकिस्तानियों का भविष्य क्या होगा यह तो वह खुद भी नहीं जानते। पर हां एक बात तो साफ है अगर गधे बेच कर नोबेल पीस प्राइज खरीदा जा सकता है तो चीन-पाकिस्तान को एक नोबेल पीस प्राइज जरूर दे देता। आपकी क्या राय है इस बारे में हमें कमेंट करके जरूर बताएं।





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