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Saturday, March 2, 2019

महाशिवरात्रि की पूरी रात नहीं सोना चाहिए, जानें इसके पीछे का रहस्य

अमावस्या से 1 दिन पहले, महीने की सबसे अंधेरी रात को शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। एक साल में 12 से 13 शिवरात्रि होती है। माघ के महीने में आने वाली शिवरात्रि महाशिवरात्रि के नाम से जानी जाती है। इस समय ऊर्जा का प्रवाह ऊपर की ओर होता है। इस दिन ग्रहों का अपकेंद्री बल एक खास तरह के काम करता है और यह बल ऊपर की ओर गति करता है। इस बात को अनुभव करते हुए योगिक परंपराओं ने यह नियम बनाया कि कोई भी इस रात को लेटेगा नहीं। आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए ताकि आप ऊर्जा के इस प्राकृतिक चढ़ाव का पूरा फायदा उठा सकें और ऊर्जा ऊपर की ओर जा सके।
पुराणों में ऐसी कई शानदार कहानियां है जो लोगों को बताती हैं इस दिन का महत्व क्या है और क्यों यह इतना खास है। कर्नाटक के कुछ इलाकों में इस रात बच्चों से कहा जाता है कि वह जाकर लोगों के घरों पर पत्थर फेंके। इस दिन आप ऐसी शरारत कर सकते हैं और इससे अपराध नहीं माना जाता है। दरअसल आपको ऐसा करने के लिए शाबाशी मिलेगी क्योंकि आपने किसी ऐसे व्यक्ति को जगा दिया जो सो रहा था। बेशक लोगों ने उठकर शिव जी का नाम नहीं लिया, उन्होंने आपको कोसा, आपको भला-बुरा कहा पर कोई बात नहीं कम से कम वो उठ कर बैठ तो गए। इस दिन हमारे तंत्र की ऊर्जा में एक प्राकृतिक चढ़ाव होता है, लेटे रहना हमारे तंत्र के लिए अच्छा नहीं होगा। इसे लंबवत यानी बिल्कुल सीधा रहना चाहिए।
आप जितने लोगों को जानते हो उन्हें यह बात बताएं। उन्हें आधी रात को फोन करें, पूरी रात हर 1 घंटे में अपने परिचितों को फोन करें भले ही वो आपको कोसे पर कोई बात नहीं वह उठ कर बैठ जाएंगे। आप उन्हें उठाकर एक बहुत बड़ी सेवा कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि आप सभी हिस्सा लें। चाहे आप यहां हो या कहीं और सीधा बैठें और जागते रहे। यह रात केवल जागरण की रात ना रह जाए बल्कि आप सभी के लिए जागृति की रात बन जाए। यही हमारी कामना और विश्वास है कि आप सभी महादेव की कृपा के पात्र बने। धन्यवाद।

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