नमस्कार दोस्तों ,भारत में एक ऐसी जगह भी है जहां ना पैसा चलता है और ना सरकार। वर्तमान समय में इंसान की जिंदगी पैसों से ही चलती है। आजकल रुपए के बिना कोई एक कदम भी नहीं चल पाता है। लेकिन अगर हम आपसे कहें की एक ऐसी जगह भी है जहां पैसों की कोई जरूरत नहीं है तो आप यकीन करेंगे? नहीं ना। इसलिए आज हम आपको ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे है जहां ना तो पैसों की जरूरत है और ना सरकार की और वह जगह हमारे भारत में ही स्थित है। भारत में एक ऐसा शहर हैं जहाँ ना तो धर्म है, ना पैसा है और ना ही कोई सरकार। आप सभी यह सोच रहे होंगे कि भारत में तो शायद ही कोई ऐसा शहर हो लेकिन यह सत्य है। और सबसे बड़ी बात यह है की यह शहर चेन्नई से केवल 150 किलोमीटर दूर है।
इस जगह का नाम बताने से पहले बता दें कि इस शहर की स्थापना साल 1968 में मीरा अल्फाजों ने की थी । इस शहर का नाम ऑरोविले है इस शहर को सिटी ऑफ़ डॉन कहा जाता है । आप सभी को जानकर हैरानी होगी कि इस शहर को बसाने के पीछे सिर्फ एक ही मकसद था कि यहाँ पर लोग जात-पात और भेद-भाव से दूर रहे। यहां कोई भी इंसान आकर रह सकता है। लेकिन शर्त सिर्फ इतनी है कि उसे एक सेवक के तौर पर रहना होगा। यह एक तरीके की प्रायोगिक शहर है जो कि विलुप्पुरम डिस्टिक तमिलनाडु में स्थित है।
आपको बता दें यहाँ कोई भी कहीं से भी आकर रह सकता है। साल 2017 तक इस शहर का आकर बढ़ता चला गया और अभी बढ़ता ही जा रहा है। अभी इस शहर में करीबन 55 देशों के लोग रहते हैं। इस शहर की आबादी लगभग 26000 लोगों की है। यहां पर एक मंदिर भी है। हालांकि मंदिर में किसी धर्म से जुड़े भगवान की पूजा नहीं होती है। यहां लोग आते हैं और योगा करते हैं। इस शहर की यूनेस्को ने भी प्रशंसा की है। आपको यह शायद नहीं पता होगी कि यह शहर भारतीय सरकार के द्वारा भी समर्थित है। हम आशा करते हैं यह जानकारी आपके लिए ज्ञानवर्धक रही होगी। धन्यवाद।
इस जगह का नाम बताने से पहले बता दें कि इस शहर की स्थापना साल 1968 में मीरा अल्फाजों ने की थी । इस शहर का नाम ऑरोविले है इस शहर को सिटी ऑफ़ डॉन कहा जाता है । आप सभी को जानकर हैरानी होगी कि इस शहर को बसाने के पीछे सिर्फ एक ही मकसद था कि यहाँ पर लोग जात-पात और भेद-भाव से दूर रहे। यहां कोई भी इंसान आकर रह सकता है। लेकिन शर्त सिर्फ इतनी है कि उसे एक सेवक के तौर पर रहना होगा। यह एक तरीके की प्रायोगिक शहर है जो कि विलुप्पुरम डिस्टिक तमिलनाडु में स्थित है।
आपको बता दें यहाँ कोई भी कहीं से भी आकर रह सकता है। साल 2017 तक इस शहर का आकर बढ़ता चला गया और अभी बढ़ता ही जा रहा है। अभी इस शहर में करीबन 55 देशों के लोग रहते हैं। इस शहर की आबादी लगभग 26000 लोगों की है। यहां पर एक मंदिर भी है। हालांकि मंदिर में किसी धर्म से जुड़े भगवान की पूजा नहीं होती है। यहां लोग आते हैं और योगा करते हैं। इस शहर की यूनेस्को ने भी प्रशंसा की है। आपको यह शायद नहीं पता होगी कि यह शहर भारतीय सरकार के द्वारा भी समर्थित है। हम आशा करते हैं यह जानकारी आपके लिए ज्ञानवर्धक रही होगी। धन्यवाद।




No comments:
Post a Comment