जय माता दी दोस्तों कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। आइए जानते हैं इस लेख के माध्यम से पूजा की सरल विधि और गोवधन पूजा के महत्व के बारे में। इस दिन सुबह जल्दी उठ कर शरीर पर तेल मालिश करके स्नान करना चाहिए फिर घर के मुख्य द्वार पर गोबर से प्रतीकात्मक गोवर्धन पर्वत बनायें। इस पर्वत के पास में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति रख दे। इसके बाद श्री कृष्ण जी के साथ -साथ देवराज इंद्र, वरुण, अग्नि और राजा बली की पूजा करें। पूजा के बाद कथा सुने व प्रसाद के रूप में दही में चीनी का मिश्रण सभी में बांट दें। इसके बाद किसी ब्राह्मण को भोजन करवाकर उसे दान दक्षिणा देकर विदा करें।
आइए जानते हैं कि क्यों करते हैं गोवर्धन पर्वत की पूजा। एक बार भगवान श्री कृष्ण अपने सखाओं के साथ गाय चराते हुए गोवर्धन पर्वत की तराई में जा पहुंचे वहां उन्होंने देखा कि पूजन की तैयारियां चल रही है । जब श्रीकृष्ण ने इसका कारण पूछा तो गोपियों ने कहा आज देवों के स्वामी इंद्र का पूजन होगा। वह पूजन से प्रसन्न होकर वर्षा करते हैं जिससे अन्न पैदा होता है तथा व्रज वासियों का भरण-पोषण होता है। तब श्री कृष्ण बोले इंद्र में क्या शक्ति है उसे अधिक शक्तिशाली तो हमारा गोवेर्धन पर्वत है। इसी कारण वर्षा होती है। हमें इंद्र से भी शक्तिशाली गोवर्धन की ही पूजा करनी चाहिए। तब सभी श्री कृष्ण की बात मानकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। यह बात जा कर नारद ने देवराज इंद्र को बताई। यह सुनकर इंद्र देव को बहुत क्रोध आया। इंद्र ने मेघों को आज्ञा दी कि वे गोकुल में जाकर मूसलाधार बारिश करें।
बारिश से डर कर सभी लोग श्री कृष्ण की शरण में गए और सुरक्षा की प्रार्थना करने लगे। उन लोगों की पुकार सुनकर श्री कृष्ण बोले तुम सब गोवर्धन पर्वत की शरण में चलो वह सब की रक्षा करेंगे। सब लोग गोवर्धन की तराई में आ गये । श्री कृष्ण ने गोवर्धन को अपनी उंगली पर उठा लिया । सभी लोग 7 दिन तक इसी की छाया में रहकर अतिवृष्टि से बचे रहे । व्रज वासियों पर जल की एक बूंद भी नहीं पड़ी। यह चमत्कार देखकर ब्रह्माजी द्वारा श्री कृष्ण अवतार की बात जानकर इंद्रदेव अपनी मूर्खता पर पश्चाताप करते हुए कृष्णा जी से क्षमा याचना करने लगे। सात दिन बाद कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा और व्रज वासियों से कहा कि अब तुम प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा किया करो तभी से यह पर गोवर्धन पूजा के रूप में प्रचलित हुआ है।
गोवर्धन पूजा का महत्व- हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है और ऐसे में गोवर्धन पूजा जैसे कृषि को प्रोत्साहित करने वाले पर्व की बहुत आवश्यकता है। इसके पीछे एक महान संदेश छिपा हुआ है। धरती माँ और गाय माता दोनों की उन्नति तथा विकास की ओर ध्यान देना और उनकी संवर्धन के लिए सदा प्रयत्नशील होना छिपा है। अन्न कूट का महत्व भी गोवर्धन पूजा एक ही दिन मनाई जाती है। अन्न कूट और गोवर्धन पूजा का पर्व अति प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है। धर्म ग्रंथों में इस दिन इंद्र, वरुण, अग्नि आदि देवताओं की पूजा करने का उल्लेख मिलता है। यह पूजा पशुधन, अन्न आदि के भंडार के लिए किया जाता है। गोवर्धन पर्व विष्णु भगवान की प्रसन्नता के लिए बनाना चाहिए। इससे आपका का कल्याण होता है। सुख प्राप्त होता है। इन सब की फल प्राप्ति हेतु गोवर्धन पूजन जरूर करना चाहिए। धन्यवाद।


No comments:
Post a Comment