नमस्कार दोस्तों 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुआ आतंकी हमला आजाद भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जाता है। इसी महीने इस घटना को पूरे 10 साल होने जा रहे हैं। हमले को अंजाम देने वाले दस आंकवादियो में से ज़िंदा पकडे गए एक मात्र आतंकी अजमल आमिर कसाब को लगता था कि वह बच जाएगा। कसाब को विशेष रूप से उच्च सुरक्षा कक्ष में स्थानांतरित करने से पहले लगभग 81 दिन तक हिरासत में रखा गया था । 2013 में रिटायर हुए रमेश महाले ने कहा जब तक अदालत की तरफ से वारंट नहीं मिला था तब तक कसाब को लगता था की भारतीय कानून से उसे राहत मिल जाएगी। रमेश महाले मुंबई पुलिस की अपराध शाखा में लंबे समय से कार्यरत रहे।
महाले ने बताया कसाब से जानकारी उगलवाने के लिए उन्होंने नरमी बरती। उन्हें पता था कि कसाब को मुश्किल पूछताछ तरीके से तोडना आसान नहीं होगा क्योकि आतंकियों को इन सब पूछताछ तरीको से गुजरने का प्रशिक्षण मिलता है । महाले ने कसाब को दो जोड़ी नए कपड़े भी ला कर दिए । एक घटना का जिक्र करते हुए महाले ने बताया जब एक दिन जब मैं उससे पूछताछ कर रहा था। कसाब ने कहा था कि उसको गुनाहों के लिए फांसी दी जा सकती है लेकिन भारतीय न्यायालय न्यायिक व्यवस्था में फांसी की सजा देना संभव नहीं है। कसाब ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की बात का हवाला देते हुए कहा कोर्ट ने उसे फांसी की सजा दे दी है लेकिन सजा देने के 8 साल बाद भी उसे लटकाया नहीं गया है।
रमेश महाले उस दिन तो कसाब की यह बात सुनकर चुप हो गए थे। लेकिन कसाब को जब फांसी के लिए मुंबई से पुणे ले जाया जा रहा था तो 3:30 घंटे यात्रा के बीच में वह एक शब्द भी नहीं बोला था। उसके चेहरे पर डर से सिवा और कुछ नहीं था। आख़री समय में उसने सिर्फ एक ही बात कही आप जीत गए मैं हार गया। 21 नवंबर को अजमल कसाब को फांसी दे दी गई। महाले ने कहा जिस पल मैंने सुना कि कसाब को फांसी दे दी गई है तो वह मेरे जीवन के सबसे बेहतरीन पलों में एक था। क्योंकि न्याय हुआ और अच्छाई की बुराई पर जीत हुई। धन्यवाद।


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