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Thursday, October 25, 2018

करवा चौथ: तो इसलिए महिलाएं छलनी से देखती हैं चांद और पति का चेहरा





नमस्कार दोस्तों, आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है। अखंड स्वभाव का यह त्यौहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। जो इस बार 27  अक्टूबर को है। सुहागन स्त्रियां अपने सुहाग की लम्बी उम्र की कामना के लिए पूरे दिन भूखे-प्यासे रह कर व्रत रखती है। शाम को चाँद के दर्शन करने के बाद ही अपना व्रत तोड़ती है। महिलाएं चाँद को निहारने के लिए छलनी या फिर आंचल का प्रयोग करती है। क्या कभी आपने सोचा है करवा चौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाएं चन्नी से या फिर परछाई से ही चांद क्यों देखती है। नहीं तो चलिए आज के इस लेख में हम आपको बताते हैं।

इसके पीछे की कहानी यह है की मान्यता के अनुसार चतुर्थी को कोई भी शुभ काम नहीं किये जाते खास कर के चाँद से जुड़े काम। क्योकि ऐसा कहा जाता है के इस दिन चाँद को देखने से इंसान पर अपयश या कलंक लगता है। इसलिए चंद्रमा को सीधे नहीं देखना चाहिए। लेकिन करवा चौथ की पूजा बिना चांद के पूरी नहीं होती है। इसलिए विधान बनाया गया है कि करवा चौथ के दिन पहले भगवान गणेश की पूजा की जाए और उसके बाद चंद्रमा को अर्ध्य दिया जाए जिसके लिए महिलाएं छलनी या आंचल का प्रयोग करें। इसलिए व्रती महिलाएं छलनी से चांद को निहारती है और उसके बाद अपने पति का मुंह देखती है और उनके हाथों पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं। आपको यह जानकारी कैसी लगी ? कमेंट में जरूर बताएं। धन्यवाद।

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