मां सूर्या देवी मंदिर: आस्था का चमत्कारी धाम - WE ARE ONE

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Friday, October 26, 2018

मां सूर्या देवी मंदिर: आस्था का चमत्कारी धाम





नमस्कार दोस्तों, आप सभी का स्वागत है। उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जिले के गौलापार नामक स्थान पर माँ सूर्या देवी का मंदिर स्थित है। यह पावन स्थान मुख्य गौलापार छेत्र से लगभग 8 किलोमीटर दूर शेल्जाम नदी के तट सदियों से भक्तजनों को असीम व अलौकिक शांति प्रदान करता आ रहा है। इस स्थान पर पहुँचने पर सांसारिक मायाजाल में भटके मानव की सभी परेशानियां दूर होती है। माँ सूर्या देवी मंदिर आस्था का प्रतीक है। लोगों का ऐसा मानना है कि जो भक्त सच्ची भावना से मां के मंदिर में मन्नतें मांगते हैं वह अवश्य पूर्ण होती है। माता की रानी की ऐसी शक्ति है कि मंदिर के आसपास की चट्टान नदी के तेज वेग से कटकर बह गयी हैं लेकिन मंदिर सदियों से ज्यों का त्यों ही आज भी बना हुआ है।


भक्तों की आस्था की प्रतीक माँ सूर्या देवी मंदिर की मान्यता के पीछे कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि ठोस पौराणिक आधार है। यही कारण है कि न सिर्फ नवरात्र बल्कि प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहां श्रद्धालुआें की भारी भीड़ उमड़ती है। सूर्या देवी मंदिर स्थानीय जनमानस में काफी लोकप्रिय है। मंदिर समिति के अध्यक्ष धीरू रैकवाल व समाजसेवी महिपाल रैकवाल ने बताया कि दूर दराज छेत्रों से भी भक्तों का आगमन यहाँ साल भर लगा रहता है। समय-समय पर होने वाले धार्मिक आयोजनों में लोग भारी संख्या में अपनी भागीदारी दर्ज कराते है। गौलापार छेत्र के बड़े-बुजुर्ग बताते है कुछ वर्ष पूर्व तक प्रत्येक भागवत और नवरात्रि के समय यहाँ पर देवी माँ का वाहन सिंह मंदिर में आता और सूर्या देवी माता के समक्ष अपना शीश नवाता था।

माँ सूर्या देवी मंदिर महाभारत कालीन गाथाओं को भी अपने अंदर समेटे हुए है। माना जाता है की वनवास काल के दौरान पांडवों ने अपना काफी समय सूर्या देवी माँ के चरणों में व्यतीत किया। सूर्या देवी मंदिर की विषेशता यह है की यह मंदिर शेल्जाम नदी के तट पर पर एक वट वृक्ष के मध्य में है। भक्तजनो को माँ सूर्या देवी की पूजा-अर्चना के लिए सीढ़ी के सहारे वृक्ष के मध्य तक जाना पड़ता है। सदियों से स्थित यह वृक्ष सूर्या देवी माँ की विराट महिमा का बखान करता प्रतीत होता है। माँ सूर्या देवी मंदिर से कुछ दूरी पर ही एक कुटिया स्थित है जहां भक्तजन भजन-कीर्तन, विश्राम आदि करते है। जिसकी सुंदरता देखते ही बनती है। कुछ भक्तजन रात्रि को विश्राम इसी कुटिया में करते है और प्रातः काल मंदिर के सामने बहने वाली नदी में स्नान कर देवी माँ की पूजा-अर्चना कर करते हैं।

2 comments:

  1. Bahut Sundar likha hai.....jai ma surya Devi ����

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  2. Jai ma surya devi..... Jai jai kar ho mata ki
    Bhut pyara likha...great write 💖💖🙏

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